कुछ रिश्ते दिल में बसते हैंबिना परिभाषा, बिना शोर, बस चुपचाप।

💫 ख़ामोशी की दस्तक

कभी-कभी ज़िंदगी में ऐसा कोई शख्स आता है जो बिना किसी औपचारिक शुरुआत के, हमारे दिल में अपनी जगह बना लेता है।
वो ना कोई वादा करता है, ना कोई दिखावा — फिर भी उसका होना हमारे लिए खास बन जाता है।

उसकी मौजूदगी किसी पुरानी धुन की तरह होती है
जो सुनी-सुनी सी लगती है, लेकिन हर बार कुछ नया महसूस कराती है।
वो इंसान हमारी दुनिया को धीमे-धीमे ऐसे रंग देता है,
जैसे कोई सुबह बिना सूरज निकले भी रोशनी कर दे।

💭 जुड़ाव जो रिश्तों से परे है

हम हर दिन कई लोगों से मिलते हैं। कुछ आते हैं, कुछ छूट जाते हैं। पर कुछ ऐसे होते हैं जो हमारी सोच, हमारी आदतों और हमारी ख़ामोशियों में हमेशा के लिए दर्ज हो जाते हैं।

वो इंसान हमारी बातों में, लिखे हुए शब्दों में, और हमारी छोटी-छोटी मुस्कुराहटों में झलकने लगता है।
हम उससे बातें करना चाहते हैं बेमतलब, बेवजह।
कभी सिर्फ उसकी आवाज़ सुनना अच्छा लगता है,
तो कभी उसकी ख़ामोशी को भी समझने लगते हैं।

यह जुड़ाव नाम नहीं मांगता।
यह अधिकार या उम्मीद की शर्तों पर नहीं चलता।
यह बस होता है गहरा, सच्चा और बेआवाज़।

🤐 जब सामने वाला जानता है… पर कहता नहीं

कभी-कभी, इतने गहरे जुड़ाव के बावजूद,
सामने वाला यह नहीं जानता कि वो हमारे लिए क्या मायने रखता है।

या शायद…
वो सब जानता है।
बस कुछ कहता नहीं।

शायद उसे डर है कि अगर शब्दों में सब कह दिया,
तो वो जादू टूट जाएगा जो अभी चुपचाप बह रहा है।

या फिर उसकी ख़ामोशी ही उसका सबसे गहरा इज़हार है।

हम पूछना चाहते हैं, लेकिन चुप रह जाते हैं।
वो जवाब देना चाहता है, पर कुछ कहता नहीं।
फिर भी एक सुकून होता है कि वो है।

🌙इसे रिश्ता कहें या नहीं फर्क नहीं पड़ता

इसे कोई रिश्ता कहे या सिर्फ जुड़ाव…
यह तय कर पाना मुश्किल है।

यह उम्र के किसी भी मोड़ पर दस्तक दे सकता है।
यह जरूरी नहीं कि वो शख्स हमारी ज़िंदगी का हिस्सा बने —
लेकिन वो हमारी रूह का हिस्सा बन जाता है।

हम यह जानते हुए भी कि हमारी राहें अलग हैं,
हर बार दिल उसी की ओर झुकता चला जाता है।
कभी याद में, कभी ख्याल में,
कभी एक पुराने गीत में, कभी किसी ख़ामोश दोपहर में।

📝 कविता — “बिना कहे”

तू कोई नाम नहीं, फिर भी हर लफ़्ज़ में है, 
हर ख़ुशी की वजह, हर खामोशी में है।

मैं तुझसे कुछ कह नहीं पाया कभी, 
पर तू हर बार मेरे जज़्बातों में है।

तेरे बिना भी तू मुझमें कुछ ऐसा है समाया, 
जैसे रूह में कोई साया बस, चुपचाप आया।

मुलाक़ातें नहीं थीं, फिर भी तू पास रहा, 
मेरे हर ख़्वाब में, तू इक एहसास रहा।

जाना है कि हम दो राहों के मुसाफिर हैं, 
पर दिल हर मोड़ पर तुझसे मिलने चला जाता है।

🔗 शब्दों के उस पार भी कुछ होता है

शायद यही सबसे खूबसूरत जुड़ाव होता है
जहाँ कुछ कहने की ज़रूरत नहीं होती।
जहाँ किसी नाम या परिभाषा से परे एक रिश्ता जन्म लेता है।

ऐसा रिश्ता जिसे छूना मुमकिन नहीं,
पर महसूस करना ज़रूर होता है।
और शायद…
इसी एहसास का नाम सच्चा जुड़ाव है।

अश्विनी कुलकर्णी

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