मोहब्बत जब शब्दों का रूप लेती है, तो वह महज़ एक किस्सा नहीं बल्कि एक इबादत बन जाती है। यह रचना उसी निस्वार्थ प्रेम और दिल के सुकून के नाम है।
इश्क़ ये तेरा मेरा, कोई किस्सा नहीं आम सा,
धड़कनों में बसा है, जैसे साज़ कोई नाम सा।
तेरी नज़रों से छूकर, हर खयाल महका है,
तेरी खुशबू है दिल में, जैसे महकता पैग़ाम सा।
तेरी बातों में जादू, तेरी चुप में भी नूर है,
हर लफ़्ज़ तेरा लगता, किसी दुआ के नाम सा।
तू मिला तो लगा, सब दुआएँ रंग लाईं,
हर दर्द अब लगे है, किसी ग़ज़ल का कलाम सा।
न शिकायत है लब पर, न कोई मलाल है,
तेरा चुप रहना भी, जैसे हो कोई इल्हाम सा।
तेरी यादों की बारिश, जब भी गिरती है मुझ पर,
रूह भी भीग जाती, जैसे हो कोई जाम सा।
लिख रही हूँ जो दिल से, ये असर है तुम्हारा,
मेरा हर लफ़्ज़ अब है, बस तेरे ही नाम सा।
उम्मीद है ये पंक्तियाँ आपके दिल के किसी कोने को ज़रूर छुएँगी। अपनी राय कमेंट्स में ज़रूर साझा करें।
@poeticanchor_ash
अश्विनी कुलकर्णी
05/11/2025



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