दिल की किताब को खोलकर देखा, तो ये एहसास हुआ,
हर खामोशी के पीछे भी एक किस्सा छुपा हुआ।
हम सबकी ज़िंदगी में कुछ कहानियाँ अधूरी रह जाती हैं…
और कुछ यादें ऐसी होती हैं, जिन्हें हम छुपा तो लेते हैं,
लेकिन भुला नहीं पाते…आज की ये कविता, उन्हीं छुपी हुई यादों के नाम है…
जो असल किताबों के पन्नों में नहीं,
बल्कि हमारे दिल की किताब के पन्नों में हमेशा ज़िंदा रहती हैं…
दिल की किताब के पन्नों के बीच, कुछ यादें दबी-सी हैं,
कुछ हसीन गुलाबी यादें हैं, तो कुछ बारिश आँसुओं की हैं।
हर पन्ने की अलग ही कहानी है, हर किस्सा इसमें रूहानी है,
ज़िक्र इसमें अपनों का है, और गैरों का भी है।
कभी अधूरी मोहब्बत की ये खामोश-सी निशानी है,
इन अल्फ़ाज़ों में छुपी एक अधूरी-सी कहानी है।
जिन्हें हम भूल जाना चाहते हैं, वो अक्सर यादों में हैं,
ज़ख्म दिल के कई हैं मगर, छुपे इन्हीं पन्नों में कहीं हैं।
कभी इन पन्नों को पलटते ही, वक़्त ठहर-सा जाता है,
बीता हुआ हर लम्हा फिर से दिल के क़रीब आ जाता है।
कुछ अल्फ़ाज़ मुस्कान बनकर होंठों पर ठहर जाते हैं,
तो कुछ खामोशियाँ आँखों से बिना कहे बह जाती हैं।
इन पन्नों में छुपे जज़्बात, आज भी सांस लेते हैं,
यही वो जगह है जहाँ हम खुद से फिर मिल लेते हैं।
@poeticanchor_ash
अश्विनी कुलकर्णी
24/03/2026




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