• सुनो… कुछ लिखा है तुम्हारे लिए… पढ़ोगे क्या?इन लफ़्ज़ों में छुपी मेरी खामोशी समझोगे क्या…? हर शब्द में तुम्हारा ही एहसास बसा है,जो दिल ने कभी कहा नहीं… वो महसूस करोगे क्या? और अगर मैं ही पढ़कर सुनाऊँ अपना लिखा,तो मेरी आवाज़ की हल्की-सी लरज़िश महसूस कर पाओगे क्या…? कभी…

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  • अब बात ना करो

    अब मुझसे मिलने की तुम बात ना करो,जो बीत गया है उसे याद ना करो। न तुमसे गिला है, न शिकवा कोई,इस दिल पे अब तुम कोई वार ना करो। जो प्यार था वो धुंधला सा हो गया,उस बुझती लौ को यूँ रोशन ना करो। फासलों ने सिखा दी है…

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  • वो एक खत… जो कभी भेजा नहीं गया

    लेखिका: अश्विनी कुलकर्णी यादों का वो सूटकेस बरसों बाद खुल गया, मायके का वो कोना यादों से मिल गया। पंद्रह सालों तक जो दफ़न था लिफाफे में, वो एक खत… जो कभी भेजा नहीं गया। “क्या कभी आपके साथ ऐसा हुआ है कि बरसों पुरानी किसी अलमारी के कोने से…

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  • अधुरी ओढ

    काही नाती नशिबाच्या पानांवर पूर्ण होत नाहीत, पण ती लेखणीच्या शाईत कायमची कोरली जातात. प्रेम म्हणजे फक्त सहवास नसतो, तर एकमेकांपासून दूर राहूनही श्वासात जपलेली ती ओढ असते. शब्दांत व्यक्त न झालेली पण डोळ्यांतून ओघळलेली ही एक अशीच प्रेमभक्ती… कळली नाही त्या मनाला, या मनाची व्यथा,तरीही रचत गेली, आमच्या प्रेमाची…

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  • दिल की किताब

    दिल की किताब को खोलकर देखा, तो ये एहसास हुआ,हर खामोशी के पीछे भी एक किस्सा छुपा हुआ। हम सबकी ज़िंदगी में कुछ कहानियाँ अधूरी रह जाती हैं…और कुछ यादें ऐसी होती हैं, जिन्हें हम छुपा तो लेते हैं,लेकिन भुला नहीं पाते… आज की ये कविता, उन्हीं छुपी हुई यादों…

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  • जब सालों बाद उससे मुलाक़ात हुई

    Heart Touching Hindi Love Story ज़िंदगी की रफ़्तार में हम कई चेहरों और यादों को पीछे छोड़ देते हैं और सोचते हैं कि वक़्त के साथ सब कुछ धुंधला हो गया है। लेकिन कभी-कभी वही अतीत अचानक हमारे सामने आ खड़ा होता है। आज की मेरी यह कहानी एक ऐसी…

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  • महिला दिवस

    हर साल एक दिन… और बाकी पूरे साल? हर साल 8 मार्च को दुनिया Women’s Day मनाती है। सोशल मीडिया पर “नारी शक्ति”, “सम्मान”, “सशक्तिकरण” जैसे शब्दों की भरमार हो जाती है। स्टेटस, पोस्ट, फूल और शुभकामनाएँ — सब कुछ अचानक बहुत ज़ोरों से दिखाई देने लगता है। लेकिन सवाल…

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  • दो देह, एक प्राण

    “लोग कहते हैं प्रेम साथ रहने का नाम है, पर सच्ची मोहब्बत तो वो है जो फासलों में भी एक-दूसरे को मुकम्मल कर दे। कुछ वैसा ही रिश्ता, जैसा राधा का कृष्ण से है और मेरा तुमसे…” प्रेम का अर्थ निराला है, जैसे राधा और श्याम,बिछड़ कर भी जो गूँजते…

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  • “शब्दांतून व्यक्त होणारी ओढ आणि मौनातून उमजणारा जिव्हाळा; एका खास व्यक्तीशी बोलताना हरवलेल्या वेळेची आणि मनाला जडलेल्या संवादाच्या छंदाची ही एक प्रांजळ कबुली.” कधी शब्दांत तर कधी मौनात,एक वेगळाच आनंद लाभला…तुझ्याशी गप्पा मारता मारता,तुझ्या आठवणींत जीव हा रमला,मला तुझ्याशी बोलण्याचा छंद लागला. काहीही न बोलता तू खूप काही सांगतोस, हसता…

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  • मोहब्बत जब शब्दों का रूप लेती है, तो वह महज़ एक किस्सा नहीं बल्कि एक इबादत बन जाती है। यह रचना उसी निस्वार्थ प्रेम और दिल के सुकून के नाम है। इश्क़ ये तेरा मेरा, कोई किस्सा नहीं आम सा,धड़कनों में बसा है, जैसे साज़ कोई नाम सा। तेरी नज़रों…

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I’m Ashwini

Honestly, I’m not a professional writer or anything. I just write sometimes—to clear my head, to feel lighter, or because a random thought won’t leave me alone until I scribble it down.

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