अब मुझसे मिलने की तुम बात ना करो,
जो बीत गया है उसे याद ना करो।
न तुमसे गिला है, न शिकवा कोई,
इस दिल पे अब तुम कोई वार ना करो।
जो प्यार था वो धुंधला सा हो गया,
उस बुझती लौ को यूँ रोशन ना करो।
फासलों ने सिखा दी है अब तसल्ली,
इस खामोशी को तुम बर्बाद ना करो।
न उम्मीद कोई, न अरमाँ रहा अब,
दिल के ज़ख्मों को फिर ताज़ा ना करो।
हम अब अपने ही सन्नाटे में है,
तुम लौट के आने की आस ना करो।
@poeticanchor_ash
अश्विनी कुलकर्णी
18/04/2026





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