“लोग कहते हैं प्रेम साथ रहने का नाम है, पर सच्ची मोहब्बत तो वो है जो फासलों में भी एक-दूसरे को मुकम्मल कर दे। कुछ वैसा ही रिश्ता, जैसा राधा का कृष्ण से है और मेरा तुमसे…”
प्रेम का अर्थ निराला है, जैसे राधा और श्याम,
बिछड़ कर भी जो गूँजते हैं, लेकर एक दूजे का नाम।
दूरी तो बस देह की है, आत्मा में वास तुम्हारा है,
जैसे बिना किनारे के, ये बहती प्रेम की धारा है।
तुम क्षितिज की वो लकीर हो, जहाँ धरती अंबर मिलते हैं,
दिखते तो जुदा हैं दोनों, पर साथ-साथ ही चलते हैं।
न जमीं आसमां तक पहुँचती, न आसमां जमीं का होता है,
पर एक-दूजे के बिन तो, अस्तित्व ही फीका होता है।
मेरा और तुम्हारा रिश्ता भी, कुछ ऐसा ही अनूठा है,
दिखने को हम दो हैं, पर ये सारा संसार ही झूठा है।
हम दूर रहकर भी पास हैं, एक धड़कन, एक ही प्राण हैं,
जैसे राधा बिन कृष्ण अधूरे हैं, और कृष्ण बिन राधा बेजान हैं।
@poeticanchor_ash
अश्विनी कुलकर्णी
30/01/2026



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